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सिर्फ समाज का ही नहीं पत्रकारों और अपने परिवार का भी दुश्मन है दया शंकर श्रीवास्तव

 

उत्तर प्रदेश का बहुचर्चित भ्रष्टाचारी दया शंकर श्रीवास्तव ने अपने सेवाकाल में PCS अधिकारी की भूमिका में भ्रष्टाचार से अकूत संपत्ति अर्जित करते हुए एक अलग कीर्तिमान बनाया है। कोई ऐसा विभाग नही रहा जिसमे दया शंकर श्रीवास्तव के लूटमार के किस्से अख़बार की सुर्खियों में न छाए हों। वित्तीय अनियमितताओं के साथ निलंबन होने से इस अधिकारी को कोई फर्क नही पड़ा, बस पैसा कमाने की धुन में लगा रहा जिसका नतीजा ये हुआ कि बेटा, पत्नी, साले, भतीजी सब पर न सिर्फ आपराधिक मुक़दमे दर्ज हुए बल्कि कोर्ट कचहरी के चक्करों में उलझे रहते है।

नकली बाल और नकली खाल धारक दया शंकर श्रीवास्तव का अपना आपराधिक इतिहास भी लंबा चौड़ा है जिसको देखकर ही इसकी हरकतें उजागर होती है। भ्रस्टाचार से कमाई अकूत संपत्ति के दम पर अधिकतर मामलों में जांच को इतना विलंब कर दिया है कि खुली हवा में सांस लेता घूम रहा है वरना जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया होता। उत्तर प्रदेश के जिला गाजीपुर में वर्ष 2004 में लिखाया गया मुक़दमा आज भी लंबित है वहीं अनेक आपराधिक मामलों में बचता घूम रहा है।

दयाशंकर का चरित्र परिभाषित करने की आवश्यकता नही, निलंबन, पेंशन कटौती और दर्जनों मुकदमों के बाद, समाचार पत्र राष्ट्रीय जन सूचना अधिकार के साथ समाज का ऐसा कोढ़ जिसकी परिभाषा नही हो सकती:-18 जून 2004 को मुख्य विकास अधिकारी गाजीपुर के पद पर निलम्बित, 21 दिसम्बर 2009 को फर्जी भुगतान एवं गम्भीर अनियमितताओं का प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के कारण निलम्बित, 20 जून 2013 को जिलाधिकारी के सम्मुख फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत करने के कारण आरोप पत्र थाना कोतवाली, जिला गाज़ीपुर, अपराध सं. 1572/2004 ऽथाना हजरतगंज, अपराध सं. 140/10 ऽ थाना हजरतगंज, धारा 418, 419, 420, 467, 468, 471, 506 ऽ थाना गाज़ीपुर, अपराध सं. 62, धारा 420, 467, 468, 471 ऽ थाना गाज़ीपुर, अपराध सं. 63 धारा 506 ऽ थाना हजरतगंज, अपराध सं. 0499/17, शासकीय गुप्त वाद अधिनियम थाना हजरतगंज में अपराध सं. 0601/18 धारा 420 ई.ओ.डब्लू./सतर्कता द्वारा मुकदमा दर्ज।

नौकरी के दौरान अपने आपराधिक कारनामो के चलते समाचार पत्रों में आये दिन छपने के कारण अब ये पत्रकारिता जगत में उछल कूद मचाता दिखता है, राष्ट्रीय जन सूचना अधिकार नाम का साप्ताहिक अखबार खरीद कर स्वयं को संपादकों की श्रेणी में रखकर मीडिया जगत में घुसपैठ में लगा हुआ है लेकिन नकली बाल लगाने के बाद भी इसकी पहचान छुप न सकी और बड़े मीडिया बैनर से जुड़े पत्रकारो पर रुपया पानी खर्चा करने के बाद भी इसका काम बन नही पाया तो मासिक और साप्ताहिक समाचार पत्रों के छोटे मोटे लोगों को संगठित करके अपना गिरोह बनाया है जिनके माध्यम से जिन पत्रकारो ने इसके विरुद्ध समाचार प्रकाशित किया था या इसके भ्रष्टाचार का खुलासा किया था उनका उत्पीड़न कर सके।

छोटे मोटे समाचार पत्र के कार्यालय जाकर माल पानी तबियत से खर्चा करता है और पत्रकारो को आपस मे लड़ाने का काम इसका चल निकला है। पर्दे के पीछे रहकर अपने नकली बालों के लटके झटके दिखा कर साप्ताहिक और मासिक समाचार पत्रों को मोटी रकम देकर समाचार प्रकाशित करवा देता है और जब उनपर मानहानि का मुक़दमा दर्ज हो जाता है तो मिलना जुलना बंद कर देता है, ऐसे ही एक प्रकरण में अपने सजातीय पत्रकार को इसने बड़ा प्रलोभन देकर फंसा लिया और जब न्यायालय द्वारा उस पत्रकार के घर की नीलामी का आदेश जारी कर दिया है तो उसका न तो फ़ोन उठा रहा है और न मिल रहा है।

सजातीय पत्रकार महोदय के पास अपनी पत्नी के साथ अदालत के कटघरे में।खड़े होने के अलावा कुछ बचा नही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय जाकर भी उनको कोई राहत मिली नही और अब न्यायालय के कठघरे में जब अपनी पत्नी के साथ खड़े होंगे तो घर और समाज मे क्या इज़्ज़त रहेगी यही सोच कर परेशान घूम रहे है।

दयाशंकर श्रीवास्त का क्या, इसको छोड़ा दूसरे को पकड़ा , सोशल मीडिया पर वायरल समाचार से ज्ञात हुआ कि इस बार मोटी रकम न देकर समाचार पत्र की कमज़ोरी भांप कर प्रिंटिंग मशीन ही लगवा दिया है और लगातार खबरे चलाने का करार किया है और जब कोई अदालती कार्यवाही में फँसेगा तो दयाशंकर किसी दूसरे या तीसरे को फसा लेगा लेकिन कहीं न कहीं पत्रकारिता से जुड़ा एक बड़ा वर्ग द्वारा दयाशंकर श्रीवास्तव के इस खेल को समाप्त करने का फैसला कर लिया है जिससे पत्रकारिता की आपसी द्वंद को रोका जा सके।

आपराधिक मुक़दमे में नामित बेटे दिव्यम, पत्नी शशि श्रीवास्तव, साले सुरेश श्रीवाताव आदि के बारे में विस्तृत रिपोर्ट अतिशीघ्र जारी होगी।

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