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18 फरवरी 2026..95वीं जयंती दिवस                 –   पंडित रामप्यारे त्रिवेदी जी

(गांधीवादी चिन्तक,पत्रकार,आध्यात्मिक विचारक,सादगी और ईमानदारी के प्रतीक पुरुष,निस्वार्थ समाज सेवक..स्वामी नारदानंद सरस्वती जी महराज-नैमिषारण्य के अनन्य शिष्य.. "भारतरत्न"श्री गुलजारीलाल नन्दा जी के पूर्व निजी सचिव")

18 फरवरी 1932 को पिता पंडित रामगुलाम त्रिवेदी एवं माता सुभद्रा देवी को द्वितीय पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई ईश्वर द्वारा..3 भाई 4 बहनें थे रामप्यारे जी..🙏

“होनहार बिरवन के होत चिकन पात”..की लोक-वाणी के अनुरूप ही रामप्यारे जी के व्यक्तित्व की ख्याति “बाल काल” से ही चहुंओर फैलती गई एक सुगंध की भांती..ग्राम राजामऊ से बछरांवा और फिर रायबरेली..😊..मेरे पिता जी को मानो स्वम सरस्वती का वरदान प्राप्त हुआ..वाणी में ओजस्वी तेज और आकर्षक व्यक्तित्व..ऐसा कि उस काल खंड 1949-53में शायद ही कोई हो जो श्यामसुंदर त्रिवेदी-रामप्यारे त्रिवेदी(न भूतो न भविष्यते-ऐसा अद्भुत भातृ प्रेम)को न जानता हो..रामप्यारे जी ने सुन्दर कंठ के साथ स्वरचित कविताओं से “सम्पूर्ण जवांर” में एक पहचान बना ली थी!रामचरित मानस और श्रीमद्भागवत गीता उन्हे युवा अवस्था से ही कंठस्थ हो गई थीं🙏

1956 छतरपुर,मध्यप्रदेश में आयोजित “गाँधी विचार चिन्तन शिविर” ने श्री त्रिवेदी जी के जीवन की दिशा परिवर्तन कर,गांधी मय हो सम्पूर्ण जीवन सेवा को समर्पित करने का संकल्प दिलाया..🙏

1958 दैवीय कृपा से नैमिषारण्य तपोभूमि के दण्डी सन्यासी स्वामी नारदानंद जी महराज का आगमन ग्राम राजामऊ में हुआ और विदाई के समय रानी राजकुवंरि साहेब ने स्वामी जी को साधु को दक्षिणा स्वरूप “गाँव का अनमोल रत्न गुरुदेव आपको दे रहीं हूं..”ऐसा कह श्री त्रिवेदी जी का हाथ स्वामी नारदानंद जी महराज-नैमिषारण्य के हाथ में दे दिया..इस सान्निध्य से हुआ था मेरे पिता के जीवन में पत्रकारिता का आरम्भ 1959 में “गौरव साप्ताहिक” के प्रकाशन द्वारा.. “सामाजिक जीवन में आध्यात्मिकता का प्रतीकस्तम्भ”..🙏

1960 पुनः दैवीय कृपा का अनुपम आशीर्वाद..कुम्भ मेले में स्वामी नारदानंद जी महराज-नैमिषारण्य के शिविर में श्री गुलजारीलाल नन्दा जी का आगमन होता है और विदाई के समय आशीर्वाद के प्रसाद स्वरूप में स्वामी जी ने श्री रामप्यारे जी का हाथ “भारत रत्न” श्री नन्दा जी के हाथ में दे दिया..1974 तक मेरे को 14 वर्ष श्री नन्दा जी का स्नेहपूर्ण सान्निध्य मिला..जिसमें कुछ समय तक श्री नन्दा जी के “निजी सचिव” के दायित्व के निर्वहन का सौभाग्य प्राप्त हुआ..🙏

1965 में श्री त्रिवेदी जी ने 47 गोमती सदन रिवर बैंक कालोनी को अपना निवास बनाया और स्व.शान्ति जी के साथ विवाह बन्धन में बन्ध गृहस्थ आश्रम का शुभारंभ किया..1968 में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसका नाम ज्ञानी रखा गया..जो एक मात्र सन्तान थी!

1969 गाँधी शताब्दी वर्ष में श्री रामप्यारे जी ने “स्वदेशी उद्घोष” पुस्तक प्रकाशित कर राष्ट्रीय पटल पर गाँधी जी को विनम्र श्रद्धांजलि दी..1972 में “तुलसी मण्डप” के आयोजन के माध्यम से “रामचरित मानस” के प्रसंगों पर विद्वतापूर्ण चर्चाओं का आरम्भ कुरुक्षेत्र में श्री नन्दा जी के कर-कमलों से हुआ था..

1973-2003 बलरामपुर अस्पताल..श्री त्रिवेदी जी के जीवन वर्णन का अभिन्न पड़ाव..नित्य सुबह से ही अपने गांव-जवांर एवं स्वजनों की सेवा हेतू अस्पताल परिसर में बरगद के पेड के नीचे चबूतरे पर बैठा हुआ उन्हें देखा जा सकता था..निस्वार्थ सेवा का अद्भुत दृश्य जो 30 वर्षों तक निरन्तर चला..

1982..गाँधी भवन,लखनऊ में मानवोदय शिविर का आयोजन श्री करण भाई जी के नेतृत्व में स्वामी नारदानंद जी महराज-नैमिषारण्य द्वारा “गाँधी जी की प्रतिमा” लोकार्पण..और “गांधी स्मारक निधी” से सन् 60 के दशक से जुड़ाव के स्वरूप ही प्रत्येक शुक्रवार को आहूत होने वाले “स्वाध्याय गोष्ठी” का अहम अंग श्री त्रिवेदी जी जीवन पर्यन्त रहे..

1989-91..”राष्ट्रीय एकता उद्घोष” नामक संकलन का प्रकाशन उस काल खंड में देश के सम्मुख उपस्थित आपसी भाई-चारे और गंगा जमुनी तहज़ीब को मजबूत करने के उद्देश्य से की गयी थी..तत्कालीन गवर्नर श्री बी.सत्यनारायण रेड्डी जी ने लोकार्पण किया था..

1994..स्वजन भारती – मासिक पत्रिका प्रकाशन अपने पुत्र ज्ञानी त्रिवेदी के साथ आरम्भ किया..सांस्कृतिक साहित्य और आद्यात्मिक विचारों के प्रचार प्रसार से सामाजिक जीवन में चरित्र निर्माण कर देश के नौजवानों में “वसुधैव कुटुम्बकम” के सनातन दर्शन की नींव रखना था,जो आज भी उनकी मृत्यु उपरान्त जारी है..

2012..”गुलजारीलाल नन्दा स्मृति संस्थान” की स्थापना कर 1973 से अनवरत आयोजित हो रहे श्री नन्दा जी के जीवन,विचार और व्यक्तित्व का युवा पीड़ि में प्रचार प्रसार करना ताकि श्री नन्दा जी के आदर्श और सादगीपूर्ण जीवन चरित्र का दर्शन हर नागरिक को हो..”सदाचार दिवस”के रूप में प्रत्येक वर्ष 4 जुलाई को नन्दा जयन्ती मनाई जाती है साहित्य प्रकाशन से भावी पीड़ि को राष्ट्र निर्माण हेतु तैयार करने का प्रयास संस्थान कर रहा है!

2016 में प्रकाशित हुई पुस्तक “सद्गुरु स्वामी नारदानंद सरस्वती” का लोकार्पण 3 नवम्बर पुण्यतिथि पर मा.दिनेश शर्मा जी तत्कालीन महापौर लखनऊ ने किया था!

2017 में प्रकाशित हुई पुस्तक “भारतरत्न श्री गुलजारीलाल नन्दा” का लोकार्पण 4 जुलाई नन्दा जयन्ती पर महामहिम श्री राम नाईक जी,राज्यपाल उ.प्र. द्वारा किया गया था..

महात्मा गाँधी जी पर लिखी पुस्तक का प्रकाशन होना था,किन्तु कालचक्र और विधाता के नियमानुसार मृत्यु अनिवार्य है जो जन्मा है उसकी..अत:13 फरवरी 2018 दिन मंगलवार “महाशिवरात्री पर्व” प्रदोष काल में श्री रामप्यारे त्रिवेदी जी का स्वर्ग लोक गमन हुआ..और एक दिव्य आत्मा का अपने उद्गम स्थल परमात्म के श्री चरणों में विलय हो गया..पंडित रामप्यारे त्रिवेदी जी अमर हैं..🙏

  1. आपकी स्मृति ना सिर्फ मेरे अपितु समस्त समाज.. परिजनों-स्वजनों.. मित्रों-परिचित जनों में आनंद और श्रद्धा का भाव उत्पन्न कर देतीं हैं..आपके सम्पर्क में आया कोई भी स्वजन ऐसा ना होगा जिसकी कोई न कोई सुखद स्मृति ना हो..बल्कि आपका स्मरण आते ही प्रत्येक व्यक्ति स्वत ही भाव विभोर हो आपकी यादों में खो जाता है..😊

आपका पुत्र होना मात्र ही मेरे लिए ईश्वर का वरदान है..🙏माताजी स्व.शान्ति त्रिवेदी के रूप में साक्षात मां जगदम्बा का आशीर्वाद..🥰

दैवय महान व्यक्तित्व का पुत्र होना ही मेरे लिये गर्व और ‘अभिमान’ की अनुभूति है..🙏🥳..ईश्वर ने सब कुछ दे दिया..आभार..🙏

आलेख–ज्ञानी त्रिवेदी

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