उत्तर प्रदेशबड़ी खबर

गतांक से आगे… उत्तर प्रदेश सूचना विभाग… “फिल्म बंधु” के धंधेबाज बंधु..!! खेल सब्सिडी के.!!

गतांक से आगे…
उत्तर प्रदेश सूचना विभाग…

“फिल्म बंधु” के धंधेबाज बंधु..!! खेल सब्सिडी के.!!
(वीडियो/आडियो से…)


सीए नंबर-01 (दूसरे सीए से)
“…आजकल उसी फर्म में हो या किसी और फर्म में..?
सीए-02
….उसी फर्म में हूं.!!
(इसके बाद थोड़ा इधर-उधर की बात…)
सीए नंबर-01….अरे वो उसका 56 हजार ही निकाला क्या?
सीए नंबर-02…हां…
(फिर आगे की तमाम बातें होती हैं)
सीए नंबर-01- अरे यार उसको देख लो…56 हजार है …यार हिंदी फिल्म है..10..12..15 लाख कर दो..जस्टीफिकेशन हो जाएगा…
(फिर लंबी बातें)
जिस सीए ने बात नहीं मानी वह विभागीय कलाकार बाबू के सीधे निशाने पर आता है और उसकी निगाह में रहता है..कुछ महीनों बाद सीए लोगों के लिए फिर से विभागीय स्तर पर नये सिरे से सूचीबद्धता होती है..और उस सीए का सेलेक्शन पैनल में नहीं होता है…!!
आडियो-02
वही कलाकार विभागीय बाबू..
सीए-..ये भी कोई बात होती है..यार आपको 30 हजार रूपए भी दिए फिर भी..
कलाकार बाबू-(ऐंठ कर) हमको कब दिए…(फिर लंबी बहस).. प्रमुख सचिव से बात करो..फिर लंबी बातचीत
आडियो नं-03
(वह सीए कलाकार बाबू से बात करने के तुरंत बाद एक अन्य बाबू जो कि उस समय फिल्म बंधु में ही कार्यरत था, को फोन मिलाता है..)
सीए-..और क्या भैया .. (कलाकार बाबू का नाम लेता है)..वो तो कह रहे (रूपे०) को दिए हैं उन्हीं से लो…
रूपे० बाबू-..हां कल आकर ले लेना..(फिर लंबी बातचीत)..अरे यार कुछ रास्ता निकालिए…(फिर बातचीत.. थोड़ी देर के लिए खामोशी और फिर )..सरकारी डिपार्टमेंट है…सिक्का उछाल के काम थोड़े न होता है..(फिर ए०डी० का नाम आता है)…
रूपे०बाबू-ठीक है ठीक है…मैं अपने पास से वापस कर दूंगा..!
सीए-ठीक है कल आता हूं..

यह कुछ आडियो और वीडियो की बातचीत के 10% अंश हैं..!! ये फिल्म बंधु है बंधुवर..!! अभी तो ऐसे-ऐसे आडियो हैं कि वो मैं बतौर एक संजिदा जर्नलिस्ट सार्वजनिक नहीं कर सकता..क्योंकि इससे विभाग की छवि को धक्का लगेगा जो मैं बिल्कुल नहीं चाहता हूं। लेकिन अगर एक बाबू विभाग में इतना निडर और शक्तिशाली हो जाए कि वह प्रमुख सचिव के नाम से ही पैसा डकारने लगे..तो आप समझ सकते हैं कि इस “बंधुत्व” की कालिमा कितनी गहरी है..इसका “ज्ञान” आपको हो जाना चाहिए..!!
आइए आगे बढ़ते हैं….सीए की सूचीबद्धता में पैसे का खेल और फिर तथाकथित स्क्रीनिंग कमेटी और सब्सिडी तक का हिसाब-किताब चलता रहता है…!!!
मेरे प्यारे बंधुओं!… अब इसके आगे “किस्सा-ए-फिल्म बंधु” फिर रफ्तार पकड़ता है। कहानी का मुख्य पात्र होता है बेचारा डरा-सहमा-मरा-कुचला मधमरा सा प्रोड्यूसर…जो कि सब्सिडी की आशा-प्रत्याशा की डोर थामकर स्क्रिप्ट जमा कराने आता है..!! बस यहीं से “मुर्गा फंसाओ” का खेल शुरू होता है..!! ठीक वैसे ही जैसे कचहरी में घुसे या नर्सिंग होम में बिस्तर पर लेटे नहीं कि आटो वाले के मीटर की तरह हिसाब-किताब शुरू..!! अब अगर आपको स्क्रिप्ट पास करानी है तो आपको “ज्ञान” प्राप्त करना होगा..!! अब जब आप फिल्म बंधु के कक्ष से विधिवत “ज्ञान प्राप्त” (जानकारी प्राप्त करना) कर लेंगे तो फिर वह आपको सीए (सं०म०) के पास भेजेगा..!! अब सीए साहेब वह नब्ज टटोलेंगे जो धड़क रही हो..मतलब वह “असल नब्ज जो जेब से जुड़ी” होती है..यहां नब्ज की बीट नापी जाएगी…!! फिर जब सब कुछ पटरी पर आ जाएगा तो आप अब आगे बढ़ेंगे…!!! बंधुत्व का सफर नामा सम्पूर्ण “ज्ञान” और “संजीव”… (संजीव का अर्थ है “जीवन देने वाला” या “पुनर्जीवित करने वाला”। यह नाम संस्कृत से लिया गया है)… के साथ खरामा-खरामा आगे बढ़ेगा…!!!
फिलहाल, मेरे साथ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के फिल्म बंधुत्व के रोचक किस्सों को पढ़ने के लिए बने रहें..
क्रमशः..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button