सपा विधायक रविदास बने सदभावना, सहयोग और उदारता की मिसाल!
सपा विधायक के पत्र से उठेगा सियासी बवंडर या सियासी एकता का खुलेगा नया अध्याय!

अनिल तिवारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा के पत्र से एक बार फिर सपा भाजपा के वाक युद्ध की राजनीति गरमा गई है। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के विरुद्ध समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया के माध्यम से की गई विवादित टिप्पणी के बाद मचा सियासी घमासान रुका ही था कि सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के इस पत्र ने एक नई राजनीति का उदाहरण पेश किया है।
राजनीतिक दलों से समाज के विभिन्न वर्ग को सीखना चाहिए, जैसा दिखता है, वैसा होता नहीं है, पक्ष और विपक्ष जितना भी एक दूसरे के विरुद्ध वाक युद्ध मे दिखे लेकिन आचरण और व्यवहार में हमेशा एक दूसरे के साथ खड़े दिखाई देते हैं और इनकी खबर लिखने वाला मीडिया जगत एक दूसरे पर अभद्र भाषा की टिपणी करता अपनी पत्रकारिता की ढोल पीटता नज़र आता है और उसकी ढोल पर उसके अन्य सहयोगी अपने ही पत्रकार साथी पर कीचड उछलते देखकर भांगड़ा करते दिखते है और ये सिलसिला चलता रहता है, सिर्फ क़िरदार बदल जाता है परंतु सियासी दल जनता के सामने एक दूसरे पर शब्दों की मार करते तो दिखाई देते है लेकिन सुख दुख में एक दूसरे के साथ खड़े दिखते है। पूर्ववर्ती सपा सरकार में एक वरिष्ठ पत्रकार के विरुद्ध विधानसभा में विशेषाधिकारी हनन का मामला लाए जाने के बाद जांच के लिए विधायकों की एक कमेटी गठित कर दी गई थी और पक्ष विपक्ष के सभी सियासी दल एक साथ नज़र आये थे।
सियासत में किसी भी राजनेता पर जब कोई मीडियाकर्मी अभद्र टिप्पणी करता है तो विपक्ष के लोग भी सत्ता पक्ष के समर्थन में खड़े दिखाई देते हैं और कुछ इसी संदर्भ में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है जिसका संज्ञान लेने के उपरांत विशेष सचिव मुख्यमंत्री द्वारा प्रमुख सचिव सूचना संजय प्रसाद से सम्पूर्ण प्रकरण की जांच कराए जाने हेतु निर्देश जारी किए गए है।
सपा विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जिसमे प्रमुखता से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या को 420, अपराधी, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को हत्यारा, विधान परिषद सदस्य संजय सेठ को सत्ता का कोढ़ और प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे को दलाल, तवायफ़ जैसे दागदार शब्दों के माध्यम से लिखे गए सामचार की पुष्टि किये जाने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है और योगी सरकार के अल्पसंख्यक विभाग को कुछ लोगों द्वारा जिस तरह दबाव बनाकर कार्य करने हेतु मजबूर किया जा रहा है, उसे उत्तर प्रदेश की बदहाल कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल बताया है। यही नही रविदास मेहरोत्रा द्वारा उत्तर प्रदेश के पत्रकारों खासतौर पर महिला पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण न दिए जाने पर भी पत्र के माध्यम से सवाल उठाया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
जानकार लोगो की माने तो इस पत्र के माध्यम से रविदास मेहरोत्रा द्वारा जहां समाजवादियों को भाजपा सरकार को घेरने के अनेक मुद्दे दे दिए है वहीं राजनीतिक नेताओं पर अनर्गल टिप्पणी करने वालों पर कार्यवाही करने की बात कहकर एकता, सदभाव का भी बड़ा संदेश दिया है। इस पत्र को ऐसे मौके पर सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल किया जा रहा है जब उत्तर प्रदेश की सियासत में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का क़द बढ़ाये जाने की अटकलें चल रही हो, ऐसे में केशव प्रसाद मौर्या को 420 और अपराधी लिखे जाने पर समाजवादी विधायक द्वारा जांच की मांग किया जाना कोई सियासी दांव भी हो सकता है जिसका परिणाम तो योगी सरकार की जांच से ही सामने आएगा।



