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प्राविधिक शिक्षा विभाग में स्थानांतरण पर रार जल्दबाजी और पक्षपात के गंभीर आरोप

अनिल तिवारी, बेबाक लेखक


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा विभाग में वर्ग 2 के अधिकारियों और कर्मचारियों की स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। कर्मचारियों ने विभाग पर मनमाने ढंग से और भारी अनियमितताओं के साथ तबादले करने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि वर्ग 1 और वर्ग 3 के तबादलों में हुई गड़बड़ियों को दबाने के लिए ही वर्ग 2 की स्थानांतरण प्रक्रिया को अत्यंत जल्दबाजी में निपटाया जा रहा है।

तबादला प्रक्रिया में नियमों की उड़ाई गई धज्जियाँ
कर्मचारियों का गुस्सा इस बात पर भी भड़का हुआ है कि इस पूरी प्रक्रिया में तय नियमों की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गई हैं। सबसे बड़ी गड़बड़ी यह सामने आई है कि काउंसलिंग शुरू होने के महज एक दिन पहले तक मेरिट सूची का कहीं कोई अता पता ही नहीं है। बिना मेरिट सार्वजनिक किए काउंसलिंग कराने की इस जल्दबाजी से पूरी प्रक्रिया में भारी धांधली और भ्रष्टाचार की प्रबल सम्भावना बन गई है। इसके साथ ही बहुत से पात्र आवेदकों के नाम इस सूची से जानबूझकर गायब कर दिए गए हैं जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

महज कुछ दिनों की नोटिस पर एक हजार कर्मचारियों को लखनऊ तलब करने का आरोप

कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि लगभग 1000 कर्मचारियों को बिना किसी ठोस पूर्व तैयारी के मात्र कुछ दिनों की शार्ट नोटिस पर लखनऊ बुलाकर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। सामान्य तौर पर इस प्रकार की व्यापक प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने की तैयारी में कई महीनों का समय लगता है। इसके साथ ही कर्मचारियों ने यह गंभीर मुद्दा भी उठाया है कि इस पूरी भागदौड़ के लिए उन्हें नियमानुसार मिलने वाला यात्रा भत्ता भी विभाग द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

चहेतों को संरक्षण और सूची से पारदर्शिता गायब
स्थानांतरण सूची को लेकर विभाग की मंशा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं…

तबादला सूची तैयार करने में किसी भी तय नियम या पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कई योग्य और हकदार कर्मचारियों के नाम जानबूझकर सूची से बाहर रखे गए हैं और चहेतों को उपकृत करने के लिए पात्र आवेदकों के नाम हटा दिए गए हैं।
विभाग में एक तथाकथित आईटी सेल सक्रिय है। इसके नाम पर कुछ चुनिंदा प्रभावशाली व्यक्तियों को सालों से लखनऊ में ही टिका कर रखा गया है जो कभी अपने मूल पदस्थापन स्थल पर जाकर काम ही नहीं करते।

विभाग में रसूखदारों के करीबियों को पूरी तरह से संरक्षण मिलने का आरोप है। कर्मचारियों ने खुलकर नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि प्राविधिक शिक्षा परिषद में विगत 6 वर्षों से जमे उप सचिव मानवेंद्र कन्नौजिया (कुर्मी, बोर्ड का समय 3 वर्ष का ही है )का नाम प्रस्तावित ट्रांसफर लिस्ट से गायब कर दिया गया है। आरोप है कि मंत्री जी से नजदीकी और आईटी सेल में बैठे उनके मित्रों ने मिलकर यह लिस्ट तैयार की है ताकि वे अपने पद पर बने रहकर कथित तौर पर अवैध वसूली का खेल जारी रख सकें। दूसरी तरफ सामान्य कर्मचारियों के साथ नियमों के विपरीत जाकर दंडात्मक रवैया अपनाया जा रहा है।

उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की उठी मांग
इस पूरे प्रकरण को लेकर संबंधित कर्मचारियों और उनके संगठनों में भारी आक्रोश है। कर्मचारी संगठनों ने उत्तर प्रदेश सरकार से पुरजोर मांग की है कि वर्ग 2 की इस पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही विभाग में चल रहे इस पूरे घटनाक्रम मैरिट छुपाने और भ्रष्टाचार के आरोपों की एक उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कमेटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। कर्मचारियों का कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले रसूखदार अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि विभाग में सुशासन निष्पक्षता और समान अवसर का सिद्धांत बहाल हो सके।

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