मदारी का खेल और मैदान बनाया विधानसभा का प्रेस रूम !

वीडियो देखें, नवनिर्वाचित अध्यक्ष को बैठने तक के लिय सम्मानजनक स्थान नही दिया गया। यही नही अध्यक्ष विक्रम राव जिन्होंने आज चुनाव जीत कर अध्यक्ष पद पाया, उन्हें एक ऑफिस बॉय की तरह ट्रीट करते हुए कोल्ड ड्रिंक सर्व करने, और चाय पानी इत्यादि सर्व करने का जिम्मा दिया गया । यही नही अध्यक्ष को सचिव जलपान के लिय निर्देश देते नजर आए और उसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाल दिया गया।
यह कैसा सम्मान….
फिलहाल जिस तरह के अध्यक्ष की अपेक्षा संयोजक और उनके सिपहसालारों को जरूरत थी शायद वो खोज पूरी हो गई।
बुद्धिजीवियों के संगठन में तो आपसी विचार विमर्श के साथ किसी सक्षम योग्य व्यक्ति का चयन अध्यक्ष पद के लिए सर्वसम्मति से किया गया होता तो बेहतर होता। क्या आम सदस्यों एवं मीडिया जगत तथा आम जनमानस में उपाध्यक्ष के के सिंह जिन्हें मात्र एक वोट स्वयं का मिला, वहीं पांच वोट पाने वाले जितेन्द्र यादव का वही सम्मान बना रहेगा। मात्र संयोजक के कह देने से सम्मान बरकरार रहेगा। यह सोचने वाला विषय है।
इससे पूर्व सड़क पर चुनाव कराकर अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने वाले शेखर पंडित जी का भी कुछ इसी तरह गुड़गान किया था संयोजक ने, लेकिन चंद दिनों में ही जब उन्हें लगा उन पर लगाम नही लगा पायेंगें तो षड्यंत्र रचकर उन्हें मनमाने ढंग से समिति से बाहर करने का प्रयास किया गया लेकिन पत्रकार वर्ग में अति लोकप्रिय होने के कारण शेखर पंडित पर कोई ज़ोर चल नही पाया।
समिति के संयोजक को पत्रकार शेखर पंडित जैसा व्यक्ति शायद इसीलिए नही भाया, क्योंकि वह अपने पद की गरिमा के अनुरूप, पत्रकार हितों को प्राथमिकता देते हुए कार्य करने वाले व्यक्ति हैं।
अब कितने दिन विक्रम राव सेवा के बदले पद पर रह पाएंगें यह भविष्य बताएगा।अब उनके स्थान पर नया कोषाध्यक्ष भी लाया गया है।
आज के चुनाव में संयोजक के आशीर्वाद से कोषाध्यक्ष विक्रम राव उपाध्यक्ष के के सिंह कृष्णा भइया एवं जितेन्द्र यादव पर भारी पड़े और करारी शिकस्त देकर जीत हासिल की। पर्दे के पीछे राव की यह जीत सच में संयोजक प्रभात त्रिपाठी की जीत है। कल तक खास समझे जाने वाले के के सिंह के लिय तगड़ा झटका है।
सूत्रों से पता चला है कि कोषाध्यक्ष पद पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव हारे संयोजक के अत्यंत करीबी ब्राह्मण रूपेंद्र उपाध्याय की भी ताजपोशी कर अध्यक्ष के साथ कोषाध्यक्ष पद को भी जेब में करने में सफल रहे खुद को स्वंयभू बने संयोजक प्रभात त्रिपाठी और विधानसभा को अपने इस खेल का जो मैदान बनाया है उसपर सरकारी कार्यवाही नही हुई तो ये गरिमामयी प्रेस रूम किसी मदारी का रूम दिखाई देगा।





