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उत्तर प्रदेश सूचना विभाग फिल्म बंधु में खेल..!! ले डूबेगा किसी दिन विभाग की इज़्ज़त-आबरू

उत्तर प्रदेश सूचना विभाग

  1. फिल्म बंधु में खेल..!! ले डूबेगा किसी दिन विभाग की इज़्ज़त-आबरू
    (पवन सिंह)
    उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में चतुर्थ तल पर एक कक्ष से संचालित होता है उत्तर प्रदेश का “फिल्म बंधु”..यहां के इस कक्ष से जो खेल-तमाशे लंबे अरसे से चल रहे हैं वह किसी दिन विभाग की ही इज़्ज़त -आबरू नहीं बल्कि राज्य सरकार की भी इज्जत ले डूबेंगे..!!! सब्सिडी के नाम पर गंध मची हुई है…। इस फिल्म बंधु की तथाकथित स्क्रीनिंग कमेटी से स्क्रिप्ट पास होने से लेकर सब्सिडी तक ऐसे-ऐसे खेल हो रहे हैं कि आप के होश उड़ जायेंगे।
    फिल्म बंधु, उत्तर प्रदेश सरकार की एक नोडल एजेंसी है, जिसका गठन फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने और राज्य में फिल्म उद्योग को विकसित करने के उद्देश्य से किया गया है। यह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत आता है और इसका नेतृत्व अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव करते हैं. फिल्म बंधु, फिल्म निर्माताओं को आर्थिक सहायता, सब्सिडी और अन्य सुविधाएं प्रदान करता है, ताकि वे उत्तर प्रदेश में अपनी फिल्मों की शूटिंग कर सकें…. लेकर विगत कुछ सालों से यहां एक सीए और एक मौजूदा कलाकार बाबू और एक पूर्व फाइनेंस आफीसर की तिकड़ी ने ऐसी सड़ांध मचा दी कि अब उत्तर प्रदेश से हिंदी फिल्म निर्माताओं ने लगभग खुद को दूर कर लिया है। वे अब छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश का रूख कर चुके हैं..!!! जब मैं यह खबर लिख रहा हूं तो अकेले इन पांच राज्यों में इस समय छोटे, मध्यम और बड़े बजट की हिंदी/क्षेत्रीय भाषाओं की कम से कम एक सैकड़ा फिल्मों की शूटिंग चल रही है..और उत्तर प्रदेश कमोबेश सन्नाटे में है। मुंबई के तमाम फिल्म निर्माताओं को उम्मीद थी सीए-कलाकार बाबू का संयुक्त मायाजाल टूटेगा और विभागीय परिवर्तन होगा, जो नहीं हुआ!! सूत्रों के अनुसार नये फाइनेंस कंट्रोलर भी इस सब्सिडी और स्क्रिप्ट पास करने के धंधे को दुरुस्त करना चाहते थे, लेकिन वह सफल नहीं रहे…यह दुकड़ी (सीए और कलाकार बाबू) मौजूदा व्यवस्था पर भारी पड़ी। हालात यह हैं कि जिन्हें स्क्रिप्ट कैसे लिखी जाती है… स्क्रिप्ट होती क्या है…टाइम ट्रांजेक्शन, टाइम लैप्स, मोनटाजे़ज, आऊटडोर, इंडोर सीन की बेसिक नालेज तक नहीं है…जिन्हें शिड्यूल्डिंग तक नहीं पता है, प्रोडेक्शन की नालेज तक नहीं हैं…वो स्क्रिप्ट कमेटी में हैं….!! मजेदार बात यह है कि जो स्क्रिप्ट ईमानदारी से ट्वायलेट के डस्टबिन में होनी चाहिए वह पास की जा रही है और जिन्हें ईमानदारी से पास किया जाना चाहिए था वह रिजेक्ट हो रही हैं…क्यों? बस इसी क्यों में वो एक कलाकार बाबू और सीए का खेल शुरू होता है..!!!
    इस बार करीब दो दर्जन फिल्मों को सब्सिडी बांटी गई लेकिन 30% कट करके? कोई वाजिब कारण किसी को नहीं बताया गया? अब फीस बढ़ाकर 1 लाख नान रिफंडेबल कर दी गई…कोई बात नहीं, यह कोई अपराध नहीं है नीतिगत निर्णय है… लेकिन अगर आप किसी की स्क्रिप्ट निरस्त करते हैं तो आपको कारण भी बताना चाहिए..!!!
    फिलहाल आज से इस फिल्म बंधु के तथाकथित बंधुत्व पर सिरीज़ शुरू कर रहा हूं…
    क्रमशः…
    (नोट- कृपया जो भी फिल्म‌ निर्माता,‌निर्देशक इस बंधुत्व पर अगर कुछ कहना चाहता है तो वह वीडियो बनाकर या लिखकर मुझे दे सकता है)

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