अपूर्ण रहे प्रयास, पर तस्वीरों में दर्ज हुईं यादें: उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का 2 साल का स्वर्णिम कार्यकाल समाप्त

अनिल तिवारी, बेबाक पत्रकार
उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददता समिति का 2 वर्ष का स्वर्णिम कार्यकाल दिनांक 31 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया लेकिन समिति द्वारा पत्रकार हितों के लिए किए गए अनेक प्रयास यादगार बन गए, भले ही वो अधूरे रह गए लेकिन तस्वीरों में यादगार तो बन गए।
1. समिति के बलशाली अध्यक्ष के अभिन्न मित्र और संवाददाता समिति के वरिष्ठ सदस्य स्व. दिलीप सिन्हा के परिवार को आर्थिक सहयोग का वादा भी अधूरा रह गया।
2. पत्रकारों के लिए उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के द्वारे आम चूसने और चाट चाटने के आयोजन में सरकारी अस्पतालों में एक अलग पंजीकरण काउंटर का वादा अधूरा रह गया।
3. वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन लागू करवाने का प्रयास भी सिर्फ प्रत्यावेदन पर लटक कर रह गया है।
4. पत्रकारों को मान्यता निर्गत करने वाली समिति भी 2 साल के कार्यकाल में न बन पाई इसका प्रयास भी अधूरा रह गया।
5. पत्रकारों को सुलभ रियायती दरों पर आवास की बातें भी हवा हवाई बनकर रह गयी, ऐसे में सरकारी आवास उपलब्ध कराए जाने के वादा भी अधूरा रह गया।
6. पत्रकारों पर हुए हमले, फ़र्ज़ी मुकदमों के विरुद्ध समिति द्वारा आवाज़ उठाने का प्रयास भी अधूरा रह गया।
7. मान्यता प्राप्त पत्रकारों एवं समिति के कार्यालय, लोक बहादुर शास्त्री भवन के प्रेस रूम पर ताला खुलवाने का ज़ोरदार प्रयास अधूरा रह गया।
8. समिति की तिमाही बैठकों का वादा भी अधूरा रह गया।
9. मान्यता प्राप्त पत्रकारों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने का प्रयास भी अधूरा रह गया।
अतः सभी सम्मानित पत्रकारगणों से अनुरोध है कि अधूरे काम और किये गए वादों को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददता समिति के कार्यकाल को 1 वर्ष और बढ़ाया जाना चाहिए लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे बढ़ाएगा कौन, यही सवाल अनेक पत्रकारों के लिए चिंता का विषय है।





