यूपी प्रेस क्लब (UP Press Club) पत्रकारों का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण केंद्र

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित यूपी प्रेस क्लब (UP Press Club) पत्रकारों का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण केंद्र है।
स्थापना और इतिहास
स्थापना: यूपी प्रेस क्लब की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी।
उद्देश्य: इसकी स्थापना लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा पत्रकारिता के मूल्यों को बढ़ावा देने, पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करने और एक ऐसा मंच तैयार करने के लिए की गई थी जहाँ देश-दुनिया के गंभीर मुद्दों पर चर्चा की जा सके। लेकिन वर्तमान में यह कुछ विशेष लोगों द्वारा अधिग्रहीत किया जा चुका है। दूसरे शब्दों में कहें तो व्यवसायिक लोगों से एक अच्छा किराया और खानपान की सुविधा यहां का रिवाज़ बन चुका है।
यह क्लब लखनऊ के हज़रतगंज क्षेत्र में चाइना बाज़ार गेट (China Bazar Gate) के पास स्थित एक ऐतिहासिक भवन में संचालित होता है। जहां अब पत्रकार कम और कथित पत्रकार ज़्यादा दिखते हैं। पत्रकारिता का मंदिर अब शाम रंगीन करने का साधन मात्र बन कर रह गया है। पहले प्रेस क्लब की सदस्यता एक प्रतिष्ठा का कारण होता था और अब ये धूमिल हो चुका है।
अपने शुरुआती दौर से ही यह क्लब न केवल समाचारों का केंद्र रहा, बल्कि साहित्य, राजनीति और कला के क्षेत्र से जुड़ी हस्तियों के मिलन का स्थान भी बना। जो अब मिल्कियत की लड़ाई के रूप में स्पष्ट नजर आता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: क्लब के गठन के समय लखनऊ की तत्कालीन प्रसिद्ध हस्तियों और वरिष्ठ संपादकों का इसमें बड़ा योगदान रहा था। यह भवन लखनऊ नगर निगम और LDA से जुड़ी लीज प्रक्रियाओं के कारण भी समय-समय पर चर्चा में रहा है।
आज भी यह उत्तर प्रदेश की राजनीति और मीडिया का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ अक्सर प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया से जुड़ी संगोष्ठियाँ आयोजित की जाती हैं।
एक पत्रकार के रूप में, आपके लिए यह स्थान निश्चित रूप से पेशेवर और ऐतिहासिक रूप से काफी मायने रखता होगा। सबसे कष्टदायक तथ्य ये है कि पत्रकारिता के इस पावन मंदिर पर एक गुट का एकाधिकार हो गया है। प्रेस क्लब की स्थापना का मूल सिद्धांत आधिपत्य की लड़ाई में न जाने कहां विलुप्त हो गया है।





