UPSRTC की 250 इलेक्ट्रिक बस निवार्दा में भारी गड़बड़ी का आरोप: बसों की गुणवत्ता व जनहित से समझौता कर ‘टाटा मोटर्स’ को टेंडर से बाहर करने का खेल

अनिल तिवारी, बेबाक पत्रकार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) द्वारा निकाली गई 250 इलेक्ट्रिक बसों (150 टाइप-III एवं 100 टाइप-II) की खरीद हेतु जारी टेंडर प्रक्रिया अब एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। मीडिया व जनहित से जुड़े सूत्रों के अनुसार, निगम के प्रबंध निदेशक (MD) अपने निजी स्वार्थों और चुनिंदा वेंडर्स को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में इस कदर हेरफेर कर रहे हैं, जिससे न केवल सार्वजनिक धन और यात्रियों की सुविधा दांव पर लग गई है, बल्कि देश की सबसे भरोसेमंद स्वदेशी कंपनी ‘टाटा मोटर्स’ को जानबूझकर इस टेंडर से बाहर रखा जा रहा है।
कोरिगेंडम (शुद्धिपत्र) के जरिए बसों की गुणवत्ता व पब्लिक के हितों से समझौता
हैरानी की बात यह है कि निगम ने जारी कोरिगेंडम (शुद्धिपत्र) के माध्यम से कई ऐसे महत्वपूर्ण तकनीकी मानकों को घटा दिया है, जिससे बसों की गुणवत्ता सीधे तौर पर प्रभावित होगी और आम जनता को नुकसान उठाना पड़ेगा:
ड्राइविंग रेंज में भारी कटौती: ईवी बसों की रेंज जो पहले 350 किलोमीटर निर्धारित थी, उसे घटाकर महज 250 किलोमीटर कर दिया गया है। इससे बसों के बार-बार चार्जिंग की समस्या पैदा होगी और लंबी दूरी की यात्राओं में यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
एसी और लंबाई से समझौता: एयर कंडीशनिंग (AC) क्षमता और बसों की मानक लंबाई जैसे कई गंभीर तकनीकी बिंदुओं को भी कोरिगेंडम के जरिए शिथिल (कॉम्प्रोमाइज) कर दिया गया है।
टाटा मोटर्स के जायज प्रस्ताव को किया गया खारिज
एक तरफ जहां अन्य वेंडर्स के लिए रेंज, एसी और लंबाई जैसे प्रमुख गुणवत्ता मानकों को कमजोर कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ टाटा मोटर्स द्वारा मांगी गई एक बेहद व्यावहारिक छूट को पूरी तरह नकार दिया गया:
टाटा मोटर्स ने यूपी की सड़कों के अनुकूल “एयर सस्पेंशन” के साथ “एयर/मैकेनिकल सस्पेंशन” का विकल्प देने का अनुरोध किया था, जो पूरी तरह सुरक्षित, टिकाऊ और CMVR नियमों के अनुरूप है।
इसके बावजूद इस प्रस्ताव पर कोई विचार न करना यह साफ दर्शाता है कि MD की मंशा टाटा मोटर्स को किसी भी कीमत पर टेंडर प्रक्रिया से बाहर रखने की है।
यूपी में निवेश और औद्योगिक माहौल पर गहरा आघात
टाटा मोटर्स का लखनऊ के देवा रोड में विशाल प्लांट स्थित है और कंपनी ने उत्तर प्रदेश में भारी-भरकम पूंजी निवेश कर रखा है, जिससे हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला हुआ है।
जनता और औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि:
निवेशकों का टूटेगा मनोबल: यदि राज्य में इतना बड़ा प्लांट और निवेश रखने वाली टाटा मोटर्स जैसी प्रतिष्ठित स्वदेशी कंपनी को ही पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से रोका जाएगा, तो भविष्य में कोई भी बड़ा उद्योगपति यूपी में निवेश करने की हिम्मत कैसे करेगा?
पब्लिक के पैसों की बर्बादी: कम रेंज और कमजोर मानकों वाली बसें खरीदकर जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को भी खराब गुणवत्ता का सफर झेलना पड़ेगा।
टाटा मोटर्स द्वारा इस पूरे विषय में माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। आम जनता और मीडिया की मांग है कि राज्य सरकार इस टेंडर प्रक्रिया की तुरंत उच्च स्तरीय जांच कराए, कोरिगेंडम के जरिए किए गए गुणवत्ता समझौते को रद्द करे और सभी योग्य भारतीय कंपनियों को निष्पक्ष अवसर प्रदान करे।





