आज 69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने लखनऊ शालीमार गार्डन बाग में 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई को लेकर एक बैठक की

लखनऊ। आज 69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने लखनऊ शालीमार गार्डन बाग में 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई को लेकर एक बैठक की जिसमें रणनीति बनाई गई कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2020 से याची बनकर याची लाभ की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के पक्ष में हालतनामा याची लाभ देने का नहीं लगाती है तो फिर ऐसी स्थिति में आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी संवैधानिक दायरे में रहकर विधानसभा का घेराव करेंगे ।
कानपुर से आए आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी नितिन पाल ने बैठक में कहा की पिछले 7 साल से उनका हर त्यौहार फीका जा रहा है और इस बार भी उनका दीपावली का त्योहार हर बार की तरह अंधकारमय ही जाएगा जबकि वह वर्ष 2020 में ही कोर्ट में याची इसीलिए बन गए थे ताकि सरकार याची लाभ देकर इस मामले का निस्तारण जल्द कर दे और जो भी संघर्ष के साथी याची बने हैं उन्हें याची लाभ का न्याय मिल जाए लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार न्याय देने के बजाय आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के मामले को पेंडिंग बनाकर लटका रही है तथा सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए 14 महीने से नहीं जा रही है और यह सब कुछ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर हो रहा है इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार दोषी है क्योंकि सरकार के इशारे पर ही अधिकारी कार्य करते हैं ।
मथुरा के आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी एवं पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता शिव शंकर ने बताया कि तत्कालीन शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने बेसिक शिक्षा सचिव के पद पर रहते हुए सितंबर 2023 में प्राथमिक शिक्षक संघ से जनपद गोंडा के जुड़े शिक्षक वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी को जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से यह बता चुके है कि 69000 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला महेंद्र पाल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार केस के तहत कोर्ट में विचाराधीन है तो ऐसी स्थिति में बीएड चयनित शिक्षकों कों ब्रिज कोर्स नहीं कराया जा सकता अब चूंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो आखिर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करके कैसे ब्रिज कोर्स कराने की अनुमति प्राप्त कर ली और आखिर कैसे इस रद्द सूची पर ब्रिज कोर्स कराया जा सकता है और अगर इतने पर भी सरकार ब्रिज कोर्स कराने का प्रयास करती है तो आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी ब्रिज कोर्स के मामले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे क्योंकि रद्द सूची पर ब्रिज कोर्स नहीं हो सकता तथा यह तभी हो जब इस भर्ती में याची बनकर याची लाभ का न्याय मांग रहे आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को याची लाभ का न्याय दिया जा सके , अगर उत्तर प्रदेश सरकार 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में याची लाभ का प्रपोजल पेश कर याची लाभ दे देती है तो यह मामला पूरी तरह से निस्तारित हो जाएगा ।
बैठक में लखनऊ पहुंचे मऊ से आए आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी बीपी डिसूजा ने कहा कि वह अब ओवररेज हो चुके हैं एवं अब बीएड अभ्यर्थियों के लिए प्राथमिक में शिक्षक बनने के लिए यह 69000 सहायक शिक्षक भर्ती एक अंतिम मौका है तथा इस भर्ती में वर्ष 2020 से आरक्षण घोटाले का केस लड़ने वाले सभी बीएड अभ्यर्थी है जो शुरू से आरक्षण घोटाले का केस महेंद्र पाल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार लड़ रहे है तथा यह मामला पिछले 14 महीने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है जहां 23 से अधिक तारीख लग चुकी है लेकिन किसी भी तारीख पर सरकार अपना पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आज तक नहीं गई अब ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह इस भर्ती में आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द याची लाभ का न्याय देकर मामले का निस्तारण करें क्योंकि आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों की आर्थिक, मानसिक और सामाजिक हालात पिछले 7 साल में इस भर्ती में न्याय न मिल पाने के कारण बहुत खराब हो गए हैं , इस भर्ती में बहुत आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के माता-पिता का पिछले 7 साल मे देहांत हो गया कि वह अपने बेटा या बेटी या बहू को इस भर्ती में न्याय पाना होना देखना चाहते थे जो सपना उनके सामने पूरा नहीं हो सका और आज भी अभ्यर्थियों को इस भर्ती में न्याय नहीं मिल पा रहा अब सरकार को आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को न्याय देने के लिए सुध लेनी चाहिए ।
बैठक में बाराबंकी से पुष्पेंद्र सिंह जेलर, कानपुर से नितिन पाल, सिद्धार्थनगर से राम बिलास, गोरखपुर से रवि निषाद मऊ से बीपी डिसूजा, आजमगढ़ से संजय, जौनपुर से शैलेन्द्र , सीतापुर से लईक भदोही से संतोष भदोही सहित काफी अभ्यर्थी मौजूद थे ।



