उत्कृष्ट पत्रकारिता हेतु डॉ मोहम्मद कामरान को मिला सर्वोच्च कृष्ण बिहारी रंग भारती सम्मान
पुलित्ज़र सम्मान से बड़ा है उत्तर प्रदेश के श्याम कुमार का रंग भारती सम्मान

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर
रंगभारती संस्था के अध्यक्ष व कार्यक्रम आयोजक श्याम कुमार, उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक पूर्व मुख्य सचिव डीएस मिश्रा न्यायमूर्ति डॉक्टर शेखर यादव द्वारा पत्रकारिता, सामाजिक, साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक डॉ मोहम्मद कामरान को रंगभरती सम्मान से किया सम्मानित।
रंगभारती संस्था के अध्यक्ष व कार्यक्रम आयोजक श्याम कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश की स्थापना की अधिसूचना 24 जनवरी 1950 को जारी हुई थी और रंगभारती संस्था ने 1985 में यूपी का स्थापना दिवस मनाने की शुरुआत की थी और 41 साल से कलमकारों, साहित्यकारों को सम्मनित करने के कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है. पत्रकारिता क्षेत्र में उनका 65 वर्ष का अनुभव है इसलिए इनके द्वारा किया गया सम्मान अपनेआप में एक बड़ा मुकाम है।
श्याम कुमार जी ने बताया कि डॉ मोहम्मद कामरान विगत 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी लेखनी के माध्यम से योगदान दे रहे है और राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार के रूप में उनके लेख विधिवत रूप से हिंदुस्तान के बड़े समाचार पत्रों में प्रकाशित होते है, अपने ओजस्वी लेखों और मुखर वाणी के चलते शासन प्रशासन को आईना दिखाने में अग्रसर रहते हैं और समाज सेवा के कार्यों में भी तत्परता से आगे दिखाई देते है।
राष्ट्रवादी, परिवारवादी सांप्रदायिक सद्भाव और दूसरों की मदद के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले है और शालीनता ऐसी कि अगर कोई गलत शब्दों से भी संबोधित करें तो उसका स्वागत भी मुस्कुरा कर करते हैं। विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रकारों की समस्याओं के समाधान हेतु ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एसोसिएशन, आईना संगठन के माध्यम से विगत 22 वर्षों से मीडिया जगत की भलाई के लिए निरंतर प्रयासरत है। मान्यता प्राप्त पत्रकारो के लिए PGI में निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, बीमा, आयुष्मान जैसे कार्यों में दिया गया इनका योगदान सराहनीय है।
रंग भारतीय सम्मान से सम्मानित डॉक्टर मोहम्मद कामरान द्वारा बताया गया की हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष उपरांत ऑनलाइन जर्नलिज्म के इस दौर में हिंदी पत्रकारिता कहीं दूर, बहुत दूर जाते दिख रही है, वेब आधारित पत्रकारिता में हिंदी और इंग्लिश का मिला जुला नया स्वरूप, हिंगलिश पत्रकारिता ने न सिर्फ पत्रकारो का स्वरूप बदला है बल्कि भाषा शैली का क़त्लेआम कर दिया है।
एक तरफ TRP दौड़ की पत्रकारिता में पत्रकारो को उछलते, कूदते, अभिनय, नाच, गाने में भी पारंगत होने की ज़रूरत हो गयी है जिसने न तो किसी भाषा शैली की ज़रूरत है और न ही किसी शब्दावली की, वहीं दूसरी तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार की हिंदी समाचार पत्रों की तरफ उदासीनता से हिंदी भाषी समाचार पत्र बड़े आर्थिक।संकट से गुज़र रहे है जिसके चलते हिंदी पत्रकारिता भी दम तोड़ते नज़र आ रही है।
आर्थिक मंदी और सरकार की उदासीनता का सबसे बड़ा असर हिंदी भाषी क्षेत्रो के समाचार पत्रों पर देखने को मिलता है, वहीं ऑनलाइन पत्रकारिता ने भाषा शैली, वर्ण व्याख्या सब कुछ बदल।दिया है, न हिंदी की वर्ण व्याख्या होती है और न ही कोई शब्दावली नजर आती है, न पूर्णविराम होता है और न ही किसी तरह की मात्रा की जरूरत होती है, लेकिन जो दिखता है, वही बिकता है के चलन के।इस दौर में हिंदी पत्रकारिता को हिंगलिश भाषा शैली ने बदल दिया है जो भविष्य में हिंदी पत्रकारिता के।लिए एक बड़ा संकट दिखाई देता है।
ऑल इंडिया न्यूज़पेपर एसोसिएशन (आईना), समाचार पत्रों के अस्तित्व को बचाये रखने हेतु सदैव प्रयासरत है जिससे हिंदी पत्रकारिता को बचाया जा सके, आईना के लिए बड़े गर्व की बात है कि हिंदी पत्रकारिता की बुनियाद हिंदुस्तान की सरजमीं पर जिस शख्स ने रखी थी वह आईना के राष्ट्रीय संरक्षक की सरजमीं के कनपुरिया पत्रकार थे, पंडित जुगल किशोर शुक्ला जी का ताल्लुक क्रांतिकारी नगरिया कानपुर से था, जिन्होंने पत्रकारिता जगत की शुरुआत एक हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र उदंत मार्तंड के नाम से 1826 में कोलकाता से की थी।
डॉ मोहम्मद कामरान द्वारा 30 वर्ष पूर्व समाज को आईना दिखाने के लिए पत्रकारिता के शुरुआती दौर में 500 प्रतियाँ प्रकाशित कर एक हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र लखनऊ शहर से शुरू किया था ठीक वैसे ही आज से 196 साल पहले पंडित जी ने कोलकाता से मात्र 500 प्रतियां हिंदी भाषी समाचार पत्र की बुनियाद रखी थी, आज के हालात और उस वक्त के हालात में कोई बहुत भारी बदलाव नहींआया, अंग्रेज़ी शासन काल की दमनकारी नीतियों के खिलाफ सच की मशाल बुलंद करना उतना ही मुश्किल था जितना आज के दौर में सच लिखना है, लेकिन तब भी आईना दिखाने वाले पत्रकार थे और आज भी ऐसे पत्रकार मौजूद है।
अपनी इन्हीं आदतों के चलते डॉ मोहम्मद कामरान का पत्रकारिता क्षेत्र में बड़ा नाम है क्योंकि हर परिस्थिति में सच के लिए लड़ने को तैयार हूँ…
किसी के हक़ में, किसी के खिलाफ़ लिख दूँगा,
मैं तो आईना हूँ, जो देखूँगा, जो समझूंगा, वो सब साफ़ साफ लिख दूँगा…



