योगी जी ! घोटालों का काला इतिहास बनाता प्राविधिक शिक्षा विभाग !

लखनऊ : संस्थागत भ्रष्टाचार और जातिगत सिंडिकेट: प्राविधिक शिक्षा विभाग में नियमों, योग्यता और वरिष्ठता को दरकिनार कर केवल एक विशेष वर्ग को अनुचित प्राथमिकता दी जा रही है और नीति-निर्धारक पदों पर एकाधिकार स्थापित कर दिया गया है। विभाग के एप्लाइड साइंस के वरिष्ठ शिक्षको को एकदम हाशिये पर ला दिया गया है जबकि पूर्व में प्राविधिक शिक्षा विभाग में प्राविधिक शिक्षा परिषद् , निदेशालय , JEECUP में महत्वपूर्ण पदों पर एप्लाइड साइंस के शिक्षको की तैनाती रही है और उन्होंने विभाग को महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं।
वर्तमान में कंप्यूटर साइंस एवं आई टी वर्ग के शिक्षको का वर्चस्व स्थापित हो गया है , महत्वपूर्ण बात यह भी है की पॉलिटेक्निक में वर्तमान समय में छात्रों का सबसे अधिक रूझान कंप्यूटर साइंस एवं आई टी वर्ग में ही है एवं सरकार द्वारा इन पदों पर प्रयाप्त नियुक्तिओं को भी किया गया है किन्तु अधिकांश सम्बद्ध लोगों में कंप्यूटर साइंस एवं आई टी वर्ग के शिक्षक ही हैं एवं लाखों रुपए सैलरी लेने वाले विभागाध्यक्ष है ,जो की वर्षो से किसी न किसी रूप में प्राविधिक शिक्षा परिषद् , निदेशालय , JEECUP,जे डी कार्यालयों में तैनात है।
महत्वपूर्ण बात यह भी है की अधिकांश सम्बद्ध विभागाध्यक्ष /लेक्चरर महिला पॉलिटेक्निक में तैनात है और सरकार एक तरफ महिलों की शिक्षा के प्रयास में लगातार सजग है एवं लाखो रूपये का उनके लिए खर्च कर रही है दूसरी तरफ सम्बद्ध विभागाध्यक्ष /लेक्चरर अपने स्वार्थ के लिए सरकार की छवि ख़राब कर रहें है, महोदय यह गंभीर वितीय अनियमितता का भी प्रकरण है।
2. दंडात्मक कार्रवाई में दोहरा मापदंड: गंभीर वित्तीय और नैतिक भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों को विभागीय मंत्री के संरक्षण में मलाईदार पदों पर बनाए रखा जा रहा है, जबकि इसके विपरीत आवाज उठाने वाले अन्य वर्ग के अधिकारियों (जैसे शिकायतकर्ता व श्री गजेंद्र सिंह लोधी) को तत्काल निलंबित कर दिया गया।
3. समानांतर सत्ता केंद्र और अवैध वसूली: नियमों के विरुद्ध ‘विशेष टेक्निकल सेल’ और अनधिकृत अटैचमेंट का सिंडिकेट बनाकर शिक्षण कार्य का परित्याग करने वाले चहेते अधिकारियों को BTE, JEECUP और फीस नियमन समिति जैसी जगहों पर वर्षों से जमाया गया है।
4. स्थानांतरण नीति एवं DPC में विसंगतियां: वर्तमान में लागू की जा रही स्थानांतरण नीति और प्रधानाचार्य पद की आगामी DPC में नियमों को मरोड़कर विशेष जाति के चहेते अधिकारियों को मलाईदार पदों पर बिठाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
1. श्री प्रवेश वर्मा (विभागाध्यक्ष/कार्यवाहक प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक मोहम्मदी लखीमपुर):
a. संस्था परिसर में स्थित कीमती हरे पेड़ों को नियमविरुद्ध कटवाकर अवैध रूप से बेचने (राजकीय संपत्ति की चोरी) का गंभीर मामला है ।
b. महिला कर्मचारियों और छात्राओं के साथ मानसिक एवं शारीरिक शोषण की अनेक शिकायतें लंबित हैं ।
c. उच्चाधिकारियों द्वारा तत्काल निलंबन की स्पष्ट संस्तुति होने के बावजूद, जातिगत संरक्षण के कारण इन्हें उसी संस्था का ‘सर्वेसर्वा’ बना दिया गया है, जहाँ ये साक्ष्यों को नष्ट कर रहे हैं और जांच को प्रभावित कर रहे हैं।
2. प्रधानाचार्य राज बहादुर सिंह (पूर्व OSD, मंत्री जी):
a. विपक्षी दल की माननीय विधायिका पल्लवी पटेल के साथ मिलकर सरकार विरोधी प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मीडिया में शासन विरोधी वक्तव्य दिए।
b. खुलेआम कर्मचारी आचरण सेवा नियमावली की धज्जियां उड़ाईं, परंतु ऊंची पहुंच के कारण आज तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई (जबकि इसी प्रकरण में शिकायतकर्ता को निलंबित कर दिया गया) ।
3. श्री राकेश पटेल (प्रधानाचार्य, MMIT चैल, कौशाम्बी):
a. महिला कर्मचारियों/छात्राओं के शोषण और अधीनस्थ अधिकारियों के अधिकारों के दमन के गंभीर मामले दर्ज हैं ।
b. जिलाधिकारी द्वारा अत्यंत गंभीर व प्रतिकूल टिप्पणियां किए जाने के बावजूद, माननीय विभागीय मंत्री जी द्वारा इन्हें संरक्षण दिया जा रहा है और पुनः किसी महत्वपूर्ण व मलाईदार स्थान पर स्थापित करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है ।
4. राजधानी (लखनऊ) व प्रमुख स्थानों पर नियमविरुद्ध तैनाती वाले अधिकारी:
a. एस.एन. सिंह (प्रधानाचार्य): विवादास्पद रिकॉर्ड होने और निलंबन के बावजूद इन्हें राजधानी में तैनात किया गया है।
b. विभागाध्यक्ष सिंडिकेट: इंद्रजीत सचान (विभागाध्यक्ष) एवं रवि सचान (विभागाध्यक्ष )15-20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भी जोड़-तोड़ कर इन्हें राजधानी में ही पदस्थापित रखा गया है, संदीप कुमार सिंह (विभागाध्यक्ष कंप्यूटर), प्रदीप कुमार (विभागाध्यक्ष मैकेनिकल), आनंद सचान (विभागाध्यक्ष इलेक्ट्रिकल), जोखू लाल पटेल (विभागाध्यक्ष कंप्यूटर) और अरुण कुमार सिंह (विभागाध्यक्ष इंस्ट्रूमेंटेशन) की प्रमुख स्थानों पर नियुक्तियां एक ही विशेष वर्ग द्वारा ‘सिस्टम कैप्चरिंग’ का उदाहरण हैं ।
5. श्री आत्म प्रकाश सिंह (विभागाध्यक्ष):
a. 22 वर्षों की सेवा में मात्र 4 वर्ष ही शिक्षण कार्य किया है ।
b. वर्तमान में IRDT कानपुर (3 दिन) और टेक्निकल सेल, लखनऊ (2 दिन) में नियमविरुद्ध दोहरी तैनाती केवल ‘अवैध वसूली’ के संचालन हेतु की गई है ।
6. मलाईदार समितियों/संस्थाओं में संबद्ध (Attached) अधिकारी:
a. श्री विकल्प कुमार सिंह, श्री कमल कुमार एवं श्री अवधेश कुमार पटेल (सभी विभागाध्यक्ष): पिछले कई वर्षों से BTE, JEECUP और फीस नियमन समिति जैसी जगहों पर नियमविरुद्ध ‘अटैच’ होकर विभागीय राजनीति व अवैध वसूली में संलिप्त हैं और 10 वर्षों से ज्यादा समय से शिक्षण कार्य छोड़ चुके हैं।
विकल्प कुमार सिंह किसी न किसी जुगाड़ से प्राविधिक शिक्षा परिषद् , उत्तर प्रदेश से पिछले आठ=दस वर्षों से जुड़े हैं ,अपनी पिछली संस्था ,उन्नाव में जब इनको प्रधानाचार्य ने छात्र छात्राओं के पठन पाठन लिए कार्य मुक्त नहीं किया गया तो मंत्री जी ने स्वयं प्रधानाचार्य को फोन करके कार्यमुक्त करने के लिए बोला था।
विकल्प कुमार सिंह खुले आम लोगों को बता रहें है की मै ही परिषद् में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर आ रहा हूँ और मै यू राइज की तरह एक और विभागीय पोर्टल बनवाऊंगा ,मै शासनदेश भी करवा लूँगा और अपने चहते लोगों को लखनऊ में सेट करवा लूँगा,मंत्री जी से बात करा दूंगा।
b. डॉ. संतोष कुमार सिंह (सचिव, फीस नियमन समिति एवं BTE): एक ही विशेष वर्ग से होने के कारण इन्हें दो-दो महत्वपूर्ण नीति-निर्धारक जिम्मेदारियां सौंपकर निदेशालय और परिषद के समस्त नीति-निर्धारण पर एकाधिकार दे दिया गया है। संतोष कुमार सिंह खुले आम लोगों से बोलते हैं हमको मंत्री जी ने यहाँ ऐसे नहीं बैठाया ,हर महीने फीस देनी है |परिषद् में सम्बद्ध रहने और बने रहने के लिए विभागाध्यक्ष /लेक्चरर से एक मुश्त राशि लेने की भी सूचना है |
a. मानवेंद्र कन्नौजिया (उप-सचिव) विकल्प कुमार सिंह(विभागाध्यक्ष) निजी संस्थाओं से अवैध वसूली का सिंडिकेट चलाते हैं ,सम्बध्त्ता प्रकरण में नाम आने के बावजूद मंत्री जी के सरंक्षण से बच गए |
b . लाल जी पटेल एवं दिनेश कुमार मौर्या (उप निदेशक, निदेशालय): अपनी विशेष जाति के होने के कारण निदेशालय में जमे हुए हैं जो केवल अपने वर्ग के हितों के लिए नियम बनाती है।
7. उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना कर संबद्ध (Attached) रहने वाले व्याख्याता: अपर मुख्य सचिव के स्पष्ट आदेशों के बाद भी इनका अटैचमेंट समाप्त नहीं हुआ।
a. विवेकानंद एवं सुनील कुमार (प्रवक्ता): ये कभी अपनी मूल संस्था में नहीं रहे और अवैध वसूली का सिंडिकेट चलाते हैं ।
b. रोहित कटियार (व्याख्याता, IT): वर्ष 2015 में नियुक्ति के बाद से मात्र 11 महीने भी अपनी मूल संस्था (औराई) में नहीं रहे और संयुक्त निदेशक (मध्य क्षेत्र) कार्यालय में संबद्ध होकर अवैध वसूली का सिंडिकेट चला रहे हैं।
c. जितेन्द्र यादव (व्याख्याता, IT): ये भी अपनी नियुक्ति (2015) के बाद से 11 महीने भी मूल संस्था (औराई) में नहीं रहे और वर्तमान में संयुक्त निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) कार्यालय में अवैध वसूली का सिंडिकेट चला रहे हैं ।
8. रश्मि सोनकर , विभागाध्यक्ष IT, राजकीय महिला पॉलिटेक्निक ,अयोध्या पिछले कई वर्षो से पहले परिषद् में अब JEECUP में ,संस्था का पठन पाठन छोड़कर . लाखों रुपए महीने की तनखाह लेकर JEECUP में क्लर्क का कार्य कर रहीं है, इसी प्रकार JEECUP में कई विभागाध्यक्ष और लेक्चरर जिनकी सैलरी लाखों में होगी क्लर्क वाला काम कर रहें है जिनकी वजह से संस्थाओं में छात्रों को अध्यापको का आभाव है ,सरकार लाखों रुपए शिक्षा के नाम पर खर्च कर रही है , JEECUP सचिव की भूमिका भी सन्धिग्ध है |
9. विभागाध्यक्ष आर्किटेक्चर जो की deputation से दुसरे डिपार्टमेंट से पिछले 4 वर्ष पूर्व पुना इस विभाग में आये वोह तो पहले PPP सेल से जुड़े जिसमे उन्होंने वर्षों मुफ्त की तनखाह उठाई अब उन्होंने अपना जुगाड़ विभागीय मुक़दमे को निपटाने में कर लिया मजे की बात उसमे पहले से ही एक विभागाध्यक्ष मोजूद थे अब 6 लाख सैलरी वाले 2 लोग विभागीय मुक़दमे निपटा रहें |
10. प्राविधिक शिक्षा परिषद्, JEECUP , निदेशालय , JD कार्यालय यह सब कामचोरो और जुगाड़ बाज विभागाध्यक्ष और लेक्चर का अड्डा हो गए हैं ,यदि माननीय मुख्य मंत्री जी इसकी जाँच कराएँगे तो स्वता स्थिथि स्पष्ट हो जायेगी।
अनिल तिवारी
बेबाक लेखक



