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विश्वगुरु भारत के ‘प्राविधिक शिक्षा विभाग’ का महा-अजूबा!

  • अवैध ‘टेक्निकल सेल’ का नया कारनामा: AICTE ही नहीं, पूरी दुनिया के उड़े होश!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा विभाग में अवैध रूप से गठित ‘टेक्निकल सेल’ ने एक बार फिर ऐसा हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया है, जिसे देखकर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) समेत पूरी दुनिया के शिक्षाविद् दातों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हैं। माननीय मंत्री जी के “कुछ खास और चहेते” अधिकारियों की मेहरबानी से बनी अध्यापन सेवा नियमावली २०२१ सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बन चुकी है। इस नियमावली में ऐसे-ऐसे अनूठे और हास्यास्पद प्रावधान किए गए हैं, जिन्हें पढ़कर किसी के भी होश उड़ जाएं।

एप्लाइड साइंस के प्रवक्ताओं को ‘आजीवन कारावास’! संविधान के आर्टिकल १४ की सरेआम धज्जियां

इस विशेष टेक्निकल सेल ने जो सबसे बड़ा ‘चमत्कार’ किया है, वह है **एप्लाइड साइंस के प्रवक्ताओं का करियर हमेशा-हमेशा के लिए लॉक कर देना।

नियम का क्रूर सच: इस नियमावली के तहत एप्लाइड साइंस के प्रवक्ता अब आजीवन सिर्फ प्रवक्ता ही बने रहेंगे।

प्रमोशन पर परमानेंट ताला: पूरे देश में ऐसा कोई भी विभाग नहीं है, जहाँ कर्मचारियों के प्रमोशन के रास्ते हमेशा के लिए बंद कर दिए जाएं। जानकारों का कहना है कि यह सीधा-सीधा भारत के संविधान द्वारा दिए गए मूलभूत अधिकारों के आर्टिकल १४ (समानता का अधिकार) का खुला उल्लंघन है।
> “वे प्रवक्ता पद पर ही नियुक्त हुए हैं और उसी पद पर घिसटते हुए रिटायर होने के लिए विभाग में आए हैं।” – यह इस नियमावली का कड़वा सच है। वे न तो कभी विभागाध्यक्ष (HOD) बन सकते हैं और न ही प्रधानाचार्य।

चहेतों का काम बनते ही ‘प्राविधिक प्रवक्ताओं’ का भी घोंटा गला!

कहा जा रहा है कि इस खेल में स्वार्थ की पराकाष्ठा देखने को मिली है। जब माननीय के चहेते अधिकारियों का काम बन गया और उन्होंने खुद के लिए ‘उच्च वेतनमान’ की व्यवस्था पक्की कर ली, तो उन्होंने अपने ही संवर्ग (कैडर) के साथ विश्वासघात करने में देर नहीं की।

प्राविधिक प्रवक्ताओं के भी प्रमोशन के रास्ते सदा के लिए बंद कर दिए गए। रही-सही कसर सीधी भर्ती के ऐसे अजीबोगरीब नियम बनाकर पूरी कर दी गई कि कोई भी योग्य उम्मीदवार आगे बढ़ ही न सके।
१३ साल में M.Tech करो, तब जाकर बनोगे प्रिंसिपल! देखिए ‘असंभव’ नियमों का गणित
इस नियमावली में योग्यता और उम्र के अनुभव का जो गणित बैठाया गया है, वह किसी विज्ञान फंतासी फिल्म जैसा है। उदाहरण के लिए:
विभागाध्यक्ष (HOD) बनने के लिए: यदि कोई व्यक्ति १३ वर्ष की उम्र में M.Tech पास करके सरकारी सेवा में आ जाए, तो वह १५ साल की सेवा का अनुभव प्राप्त करने के बाद २८ साल की उम्र में विभागाध्यक्ष पद के योग्य हो पाएगा।

प्रधानाचार्य बनने के लिए: उसी अद्भुत बालक को ३५ वर्ष की उम्र का होने पर प्रधानाचार्य पद के लिए आवेदन करने का ‘सौभाग्य’ मिलेगा।

हैरानी की बात यह है कि यह पूरा का पूरा “गोरखधंधा” माननीय मंत्री जी की नाक के ठीक नीचे होता रहा और उन्होंने बिना सोचे-समझे इस पर अपनी मंजूरी की मुहर भी लगा दी।

विश्वगुरु के आगे नतमस्तक दुनिया: पैदा होते ही बच्चों को दी जा रही प्राविधिक शिक्षा! इस बेमिसाल और ऐतिहासिक नियमावली को देखकर पूरी दुनिया अचंभित है और भारत के इस ‘अनोखे’ विभाग के आगे नतमस्तक हो चुकी है। अब विदेशों और देश के कोने-कोने में लोग अपने बच्चे के पैदा होते ही उसे लोरी सुनाने के बजाय प्राविधिक शिक्षा दिलाना शुरू कर रहे हैं, ताकि वह बड़ा होकर इस ‘होनहार’ और चमत्कारी विभाग में विभागाध्यक्ष या प्रधानाचार्य बनने का असंभव सपना पूरा कर सके!

अब देखना यह है कि इस महा-अजूबे पर पर्दा डाला जाता है या फिर नियमों की इस खिचड़ी को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

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