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श्याम कुमार: पत्रकारिता के पूरक, जब तक सांस है पत्रकारिता के हौसले बुलंद है…

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त मतदाता समिति, पुनर्गठित, द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता को मजबूत बनाने वाले लोगों में से श्याम कुमार को भीष्म पितामह के सम्मान से नवाज़ा गया क्योंकि श्याम कुमार पिछले कई दशकों से निस्वार्थ भाव से सच को सामने लाने, सत्ता से सवाल पूछने, आम आदमी की आवाज बनाकर शासन प्रशासन को आईना दिखाने की पत्रकारिता की एक बड़ी पहचान है, यही नहीं रंगभारती सम्मान के माध्यम से श्याम कुमार द्वारा अपने जीवन के 85 वर्ष में भी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जिस तरह समाज के चुनिंदा लोगों का सम्मान किया जाता है वह देश में ही नहीं विश्व में एक बड़ा मिसाल है।

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति, पुनर्गठित, के प्रवक्ता अनिल तिवारी द्वारा बताया गया कि श्याम कुमार ने हमेशा पत्रकारिता के मूल धर्म – सत्य, निष्पक्षता और जनहित – को सबसे ऊपर रखा। खबरों को सनसनी बनाने के बजाय उन्होंने तथ्यों की पड़ताल पर ज़ोर दिया। उनके लेखों में भाषा सरल होती थी, लेकिन बात सीधे दिल और दिमाग पर लगती थी।

पुनर्गठित समिति के संयुक्त सचिव द्वारा श्याम कुमार की जीवन शैली पर एक पुस्तक लिखे जाने की पेशकश भी की है और बताया की जब बड़े अखबार और चैनल शहरों तक सिमट जाते हैं, तब श्याम कुमार जैसे पत्रकार गांव, कस्बे और हाशिए पर खड़े लोगों की कहानियां उठाते हैं। किसान की समस्या हो, शिक्षा की बदहाली हो या स्वास्थ्य सेवाओं का हाल – उन्होंने ज़मीनी रिपोर्टिंग से इन मुद्दों को मुख्यधारा में लाया।

पत्रकारों के अति प्रिय और पुनर्गठन समिति के प्रभावशाली सदस्य सुजीत द्विवेदी ने कहा आज के दौर में जहां सच लिखना आसान नहीं होता वही अग्रज श्याम कुमार की कलम कभी भी किसी दबाव और लालच पर नहीं झुकी और उनकी पत्रकारिता में ना कभी कोई चापलूसी थी ना कोई पूर्वाग्रह दिखाई दिया बल्कि जनता के हितों में समाज को आईना दिखाने का काम किया गया है।

पुनर्गठित समिति के अध्यक्ष शेखर पंडित ने श्याम कुमार जी को भीष्म पितामह का सम्मान दिए जाने पर बताया आज जब पत्रकारिता पर व्यावसायिकता और TRP का दबाव बढ़ रहा है, श्याम कुमार जैसे लोग दिखाते हैं कि ईमानदार पत्रकारिता अब भी मुमकिन है। उनके काम से नई पीढ़ी को यह समझ आता है कि पत्रकार सिर्फ खबर देने वाला नहीं, समाज का प्रहरी होता है जिसके लिए उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति, पुनर्गठित ने उन्हें भीष्म पितामह के समान से सम्मानित किया गया है।

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