उत्तर प्रदेशबड़ी खबरराज्य

प्राविधिक शिक्षा विभाग में नही रुक रहा भ्रष्टाचार का कारोबार, न कार्यवाही और न हीं कोई जांच के चलते मस्त है सारे अधिकारी

पिछले दिनों समाचार पत्रों में प्राविधिक शिक्षा, पॉलिटेक्निक स्कूलों के सम्बद्ध व्याख्याताओं और विभागाध्यक्ष की कामचोरी और भष्टचार की खबरों ने विभाग में एक नए वातावरण को जन्म दिया एक ओर एक बड़ा वर्ग साफ तौर से विभाग में सम्बद्ध व्याख्याताओं और विभागाध्यक्ष के खिलाफ है और ए आई सी टी के लाखों के वेतन को पाने वाले किन्तु मुफ्त में तन्खवाह उठाने वाले के खिलाफ है लेकिन चंद सम्बद्ध व्याख्याताओं और विभागाध्यक्ष इन ख़बरों को छुट भैय्ये अखबारों और पत्रकारों के विरुद्ध माहौल बना कर पत्रकारिता को बदनाम और खरीदने का भ्रम पाल रहें हैं।

एप्लाइड वर्ग के अध्यापको को ए आई सी टी का वेतनमान न मिल पाए इसके लिए तथाकथित विभागाध्यक्ष और प्रधानाचार्यों ने व्यग्तिगत प्रतिष्ठा का प्रशन बना लिया, इसके लिए तात्कालिक अपर मुख्य सचिव और विभागीय उच्च अधिकारिओं के सामने गलत तथ्य रखे गए इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी इक्कठा करने एवं स्वयं सेवा निर्वृत कर्मचारिओं द्वारा यह बताया गया की पूर्व में प्राविधिक शिक्षा परिषद् , संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद् ,निदेशालय कानपूर में एप्लाइड वर्ग के अध्यापको का महतवपूर्ण योगदान रहा जेसे आर बी यादव ,वी के शुक्ला ,एन यू खान , निशा बहुगना ,डाक्टर वी एस सिंह आदि जिनके बनाये गए सूत्र वाक्यों के आधार पर आज भी विभाग चल रहा है|
बीसिओं वर्ष की सेवाएँ देने के बाद भी रिटायरमेंट की दहलीज पर आकर भी वर्तमान में एप्लाइड वर्ग के अध्यापको का कोई प्रमोशन नहीं मिल रहा है , विभाग के पुराने सहायक प्रवक्ता भी समाचार पत्रों की ख़बरों का समर्थन कर रहें है,लगातार अखबारों को प्रोत्साहित कर रहें है की पहली बार किसी ने विभाग की सही खबर को बताया।

विभाग के शुभ चिन्तक यह भी बता रहें की संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद्,लखनऊ में लगभग 10 से 15 व्याख्याताओं और विभागाध्यक्ष सम्बद्ध हैं जैसे पूजा सक्सेना , राही ,मोईन अहमद, कुलदीप श्रीवास्तव आदि जिनकी तन्खवाह ए आई सी टी का वेतनमान मिलने के बाद लगभग 3 लाख रूपए महिना की है लेकिन पढ़ाने से इन सबका दूर तक कोई नाता नहीं ,इसमे आई टी की महिला व्याख्याता जिनको इस विभाग में आये हुए 7-8 साल हो गए अब तक 1 बार भी अपनी पॉलिटेक्निक जिससे यह लाखों की तन्खवाह उठा रहीं हैं एक भी क्लास नहीं ली है।

इस पूरे प्रकरण में संस्थाओं में कार्यरत अध्यापक और शिक्षक वर्ग इस बात से भी कुंठित है की संस्थाओं में चाहे पॉलिटेक्निक चलो अभियान में जाना हो या परीक्षा की ड्यूटी हो या जनगड़ना ड्यूटी हो चाहे निदेशालय की रिपोर्ट तैयार करनी हो या संस्था में कोई प्रत्योगी परीक्षा हो स्टाफ की कमी बताकर हम ही लोगों की ड्यूटी लगाई जाती है और सबद्ध व्याख्याताओं और विभागाध्यक्ष केवल मौज करते।

माननीय मुख्मंत्री जी से विनम्र निवेदन है की इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है , दूसरे प्रदेशों की तुलना में डिप्लोमा सेक्टर की दुर्गति हूँ रही है ए आई सी टी का वेतनमान लेने वालों कामचोर शिक्षको पर तत्काल कार्यवाही करने की आवश्यकता है यदि टेक्निकल सेल /अन्य पोर्टल पर कार्य करने में टेक्निकल रूप से इतना ही दक्ष हैं तो अपनी मूल संस्था में रहकर अपनी टेक्निकल दक्षता का लाभ पॉलिटेक्निक के छात्रों को दें और ऑन लाइन माध्यम से विभाग का कल्याण करें यहाँ यह भी मजे की बात है विभाग के टेक्निकल एक्सपर्ट (टेक्निकल कमेटी ) निदेशालय की वेबसाइट भी नहीं बना पाए उसको भी निजी संस्था चला रही है यही स्थिति अन्य कार्यालय जेसे बी टी ई , संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद् .फीस नियमन की भी है जिसमे विभाग लाखों रुपए खर्च कर रहा है।

Related Articles

Back to top button